सख्ती से बौखलाया फार्मासिस्ट! : डिप्टी सीएम पर निकाली भड़ास
उत्तर प्रदेश
07:32 AM, Mar 18, 2026
लखनऊ में निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर करने वाले उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के खिलाफ सोनभद्र में एक सरकारी फार्मासिस्ट की आपत्तिजनक और गाली-गलौज भरी टिप्पणी सामने आने से हड़कंप मच गया है। यह मामला न सिर्फ सरकारी सेवा की मर्यादा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि क्या सख्ती से घबराए कुछ कर्मचारी अब खुलेआम अनुशासन को चुनौती देने लगे हैं।

सोनभद्र
Share:
Published By
Neeraj Shukla
सूबे के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा लखनऊ के चिनहट सीएचसी में किए गए औचक निरीक्षण के बाद प्रदेशभर में स्वास्थ्य विभाग में सख्ती का माहौल बना है। निरीक्षण के दौरान गंदगी, लापरवाही और अव्यवस्थाओं पर जताई गई नाराजगी साफ संकेत देती है कि सरकार अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।लेकिन इसी सख्ती के बीच सोनभद्र से जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। सीएमओ कार्यालय के पास संचालित अर्बन पीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट मनोज राठौर ने सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम के खिलाफ न सिर्फ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, बल्कि खुलेआम गाली-गलौज कर अपनी मानसिकता भी उजागर कर दी।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक सरकारी कर्मचारी को इतनी छूट मिल गई है कि वह प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ सार्वजनिक मंच पर इस स्तर की भाषा इस्तेमाल करे? या फिर यह मान लिया जाए कि विभागीय नियंत्रण और अनुशासन पूरी तरह कमजोर हो चुका है ?
उपमुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला स्वास्थ्य कर्मी।
अभद्र टिप्पणी: फार्मासिस्ट की दबंगई या सिस्टम की ढिलाई ? कार्रवाई टली तो उठेंगे बड़े सवाल
यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की झलक है जिसमें कुछ कर्मचारी खुद को जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं। जब मरीज अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकते हैं, दवाइयों की कमी रहती है और समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, तब ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि समस्या सिर्फ संसाधनों की नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति की भी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी
जानकारों का मानना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए इस तरह की अभद्र टिप्पणी करना सीधे-सीधे सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और यह कदाचार (misconduct) की श्रेणी में आता है। अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अन्य कर्मचारियों को भी खुली छूट देने जैसा होगा कि वे भी नियमों की अनदेखी करें और उच्चाधिकारियों के खिलाफ मनमानी भाषा का इस्तेमाल करें।
डॉ. पीके राय सीएमओ सोनभद्र।
डिप्टी सीएम का औचक निरीक्षण जहां सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम था, वहीं सोनभद्र की यह घटना उस सुधार प्रक्रिया को चुनौती देती नजर आ रही है। अब देखने वाली बात होगी कि मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से उक्त कर्मचारी पर कोई सख्त कार्रवाई की जाती है या फिर उसे अभयदान देकर पूरे सिस्टम में गलत संदेश जाने दिया जाता है।

