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क्या अपनी ही जमीन पर हक मांगना और ब्राह्मण होना अपराध हो गया है?: सोनभद्र में कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष की दर्दभरी गुहार ने खड़े किए कई सवाल

सोनभद्र

10:54 AM, May 30, 2026

सोनभद्र। "क्या ब्राह्मण होना अब दुर्भाग्य बन गया है? क्या अपनी ही जमीन और मकान पर अधिकार पाने के लिए वर्षों तक दर-दर भटकना पड़ेगा?"—यह सवाल कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर उठाया है। उनकी यह पोस्ट केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती दिखाई दे रही है।

क्या अपनी ही जमीन पर हक मांगना और  ब्राह्मण होना अपराध हो गया है?: सोनभद्र में कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष की दर्दभरी गुहार ने खड़े किए कई सवाल

सोशल मीडिया पोस्ट

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Neeraj Shukla

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Neeraj Shukla

महिला जिलाध्यक्ष का दावा है कि उनकी जमीन की एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन बार पैमाइश हो चुकी है। राजस्व अभिलेख उनके पक्ष में हैं, मकान वर्षों पहले बन चुका है, लेकिन आज भी वह अपने ही घर में निश्चिंत होकर काम नहीं करा पा रही हैं। उनका आरोप है कि जब वह अपने मकान पर मिट्टी गिरवाने पहुंचीं तो विरोध करते हुए ट्रैक्टर तक रोक दिया गया और उन्हें अपमानित किया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी तो उन्हें ही वहां न जाने और विवाद से दूर रहने की सलाह दी गई। सवाल उठता है कि यदि किसी व्यक्ति के पास जमीन के कागज, पैमाइश और राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं, तब भी वह अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहा है तो आखिर कानून और प्रशासन की भूमिका क्या रह जाती है?
महिला जिलाध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा है कि उन्हें गालियां दी गईं, धमकाया गया और एक अवसर पर उनके साथ मारपीट की आशंका तक पैदा हो गई। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल भूमि विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था का भी गंभीर विषय है।
उनकी पोस्ट का सबसे मार्मिक हिस्सा वह है जहां वह लिखती हैं कि सात वर्षों से न्याय की तलाश में भटक रही हैं। एक तरफ सरकार कानून का राज स्थापित करने के दावे करती है, दूसरी तरफ यदि कोई महिला अपने ही मकान का ताला खोलने और निर्माण कार्य कराने में खुद को असुरक्षित महसूस करे तो यह व्यवस्था के लिए चिंतन का विषय है।
इस पूरे प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि राजस्व विभाग की पैमाइश और अभिलेखों के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हो रहा, यदि पुलिस शिकायत के बावजूद पीड़ित पक्ष खुद को असहाय महसूस कर रहा है और यदि गांव तथा स्थानीय प्रशासन विवाद सुलझाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो आखिर आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे?
कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सोनभद्र पुलिस और राजस्व विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को केवल एक और भूमि विवाद मानकर फाइलों में दबा देता है या फिर निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाता है।

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