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"‘पैसे दो, वरना जिंदगी बर्बाद कर दूंगी’: : वायरल चैट के दावे से चर्चित प्रकरण में नया ट्विस्ट"

सोनभद्र

08:46 PM, Jun 13, 2026

राबर्ट्सगंज, सोनभद्र। शादी का झांसा देकर शोषण, मारपीट और धमकी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में आए नर्सिंग स्टाफ प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। जिस मामले में दलित युवती की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, उसी मामले में अब आरोपी पक्ष सामने आया है और उसने खुद को निर्दोष बताते हुए युवती पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

"‘पैसे दो, वरना जिंदगी बर्बाद कर दूंगी’: : वायरल चैट के दावे से चर्चित प्रकरण में नया ट्विस्ट"

राबर्ट्सगंज कोतवाली।

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Neeraj Shukla

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Neeraj Shukla

बताते चलें कि राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में दर्ज हुए चर्चित नर्सिंग स्टाफ प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। मिर्जापुर जनपद के राजगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली तथा वर्तमान में सोनभद्र में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक  नर्सिंग स्टाफ की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी पक्ष खुलकर सामने आया है। आरोपी युवक सोनभद्र के शाहगंज थाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है।मामले में पहले युवती ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कई वर्षों तक शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए, लेकिन विवाह का समय आने पर अपने वादे से मुकर गया। युवती का यह भी आरोप था कि शिकायत करने के बाद आरोपी पक्ष के कई लोग राबर्ट्सगंज स्थित उसके किराए के कमरे पर पहुंच गए, जहां उसके साथ मारपीट की गई तथा शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। इस मामले को लेकर वह घंटों कोतवाली में बैठकर न्याय की गुहार लगाती रही थी, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।अब मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी पक्ष ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपना पक्ष सामने रखा है।

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आरोपी पक्ष ने लगाए ब्लैकमेलिंग के आरोप, सोशल मीडिया पर वायरल किए चैट

आरोपी पक्ष से जुड़े लोगों का दावा है कि युवती ने पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क स्थापित किया और बाद में कथित रूप से उससे पैसों की मांग की। आरोपी पक्ष द्वारा कुछ कथित चैट और स्क्रीनशॉट भी सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें पैसों के लेन-देन और बातचीत का उल्लेख दिखाई दे रहा है।आरोपी पक्ष का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी गई थी। वहीं युवती अपने लगाए गए आरोपों पर कायम है और न्यायिक कार्रवाई की मांग कर रही है।मामले ने नया मोड़ लेने के बाद अब यह केवल शादी का झांसा देकर शोषण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में वायरल चैट, सोशल मीडिया पोस्ट और स्क्रीनशॉट की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच तथा डिजिटल फॉरेंसिक परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।सूत्रों का कहना है कि विवेचना के दौरान पुलिस मोबाइल चैट, कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। मामले की संवेदनशीलता और दोनों पक्षों के गंभीर आरोपों को देखते हुए अब लोगों की नजरें पुलिस जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।

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पीड़िता की प्रतिकात्मक तस्वीर



कोतवाली से सोशल मीडिया तक पहुंचा मामला
शुरुआत में राबर्ट्सगंज कोतवाली तक सीमित रहा यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों से जुड़े समर्थक अपने-अपने दावे और तर्क सामने रख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित चैट और स्क्रीनशॉट ने मामले को नई दिशा दे दी है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच का आधार केवल सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्य और दर्ज बयान होंगे। ऐसे में वायरल दावों से इतर अब सभी की निगाहें विवेचना के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।

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प्रतिकात्मक तस्वीर।



वायरल चैट से बढ़ी चर्चा, जांच पर टिकी निगाहें
मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ कथित चैट, स्क्रीनशॉट और संदेश तेजी से वायरल होने लगे हैं। आरोपी पक्ष इन्हें अपनी बेगुनाही का आधार बता रहा है, जबकि पीड़िता अपने लगाए गए आरोपों पर कायम है। वायरल सामग्री में पैसों के लेन-देन और बातचीत का उल्लेख दिखाई दे रहा है, हालांकि इनकी सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में अब पूरे मामले की सच्चाई पुलिस विवेचना, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आ सकेगी। फिलहाल चर्चित प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और लोगों की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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प्रतिकात्मक तस्वीर।


मोबाइल, बैंक खाते और कॉल डिटेल बन सकते हैं अहम साक्ष्यजांच के दौरान पुलिस के लिए मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि दोनों पक्ष अपने दावों के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं तो उनकी तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है। ऐसे साक्ष्य ही आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच वास्तविक तथ्यों तक पहुंचने का आधार बन सकते हैं।

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