सुबह से कोतवाली में न्याय की आस लगाए बैठी है नर्सिंग स्टाफ,: शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
05:07 PM, Jun 7, 2026
राबर्ट्सगंज, सोनभद्र। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय को लेकर सरकार और प्रशासन चाहे जितने दावे करे, लेकिन राबर्ट्सगंज कोतवाली में रविवार को सामने आया एक मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

राबर्ट्सगंज कोतवाली में बैठी पीड़िता।
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Published By
Neeraj Shukla
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मिर्जापुर जनपद के राजगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली तथा वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत एक दलित युवती सुबह से कोतवाली में बैठकर न्याय की गुहार लगाती रही, लेकिन देर शाम तक उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं हो सका।पीड़िता का आरोप है कि सोनभद्र के शाहगंज थाना क्षेत्र निवासी एक युवक ने वर्षों तक उसे शादी का भरोसा दिया, भविष्य के सपने दिखाए और इसी भरोसे के आधार पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती का कहना है कि उसने इस रिश्ते को पूरी ईमानदारी और गंभीरता से निभाया तथा उसे विश्वास था कि एक दिन दोनों विवाह के बंधन में बंधेंगे। लेकिन जब शादी की बात को अंतिम रूप देने का समय आया तो आरोपी पीछे हटने लगा।
पीड़िता के अनुसार जब उसने विवाह को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा तो आरोपी टालमटोल करने लगा। धीरे-धीरे उसे महसूस हुआ कि उसके साथ धोखा किया जा रहा है। इसके बाद उसने न्याय की उम्मीद में दो दिन पूर्व राबर्ट्सगंज कोतवाली में शिकायत की। बताया जाता है कि शिकायत के बाद आरोपी पक्ष ने समझौते का प्रस्ताव रखते हुए शादी करने का आश्वासन दिया था। इस आश्वासन के बाद युवती को लगा कि विवाद का समाधान निकल जाएगा और उसे न्याय मिल जाएगा। लेकिन आरोप है कि कुछ ही समय बाद आरोपी अपने वादे से पलट गया।
पीड़िता का कहना है कि समझौते और शादी की बात महज समय लेने तथा दबाव कम करने की रणनीति थी। जब उसने दोबारा कार्रवाई की मांग की तो आरोपी पक्ष आक्रामक हो गया।
युवती ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह मामला और गंभीर हो गया। उसके अनुसार 7 से 8 लोगों की संख्या में आरोपी पक्ष के लोग राबर्ट्सगंज स्थित उसके किराए के कमरे पर पहुंच गए। आरोप है कि सभी लोग जबरन कमरे में घुस गए और उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, उसे शिकायत वापस लेने और मामले को आगे न बढ़ाने की धमकी भी दी गई। पीड़िता का कहना है कि घटना के दौरान उसे काफी भय और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद वह सीधे कोतवाली पहुंची और पुलिस से सुरक्षा तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की। लेकिन पीड़िता का आरोप है कि सुबह से कोतवाली में बैठे रहने के बावजूद उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इससे वह स्वयं को असहाय और निराश महसूस कर रही है।
पीड़िता ने कहा कि वह एक दलित परिवार से आती है और अपने अधिकारों तथा न्याय व्यवस्था पर भरोसा करते हुए पुलिस के पास पहुंची है। उसका कहना है कि यदि शिकायत के बाद भी उसे सुरक्षा नहीं मिलेगी और आरोपी पक्ष खुलेआम दबाव बनाता रहेगा तो उसके लिए न्याय पाना और भी कठिन हो जाएगा।
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि एक महिला, वह भी स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत शिक्षित युवती, अपने साथ हुए कथित अन्याय को लेकर सुबह से कोतवाली में बैठी है और फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही है तो यह चिंता का विषय है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं इस पूरे प्रकरण में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका है। हालांकि कोतवाली में पीड़िता की मौजूदगी और शिकायत की चर्चा पूरे दिन होती रही। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठी पीड़िता को कब तक राहत मिलती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शादी का झांसा देकर शोषण, मारपीट और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाने वाली दलित युवती यदि सुबह से कोतवाली में बैठी है, तो उसकी शिकायत पर अब तक मुकदमा क्यों नहीं दर्ज हुआ?
(नोट: समाचार में वर्णित सभी आरोप पीड़िता द्वारा लगाए गए हैं। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।)

