मृतकों के नाम पर लूट! : 14 हजार ‘मरे हुए किसान’ खाते रहे सम्मान निधि, सिस्टम सोता रहा
सोनभद्र
08:46 AM, Mar 20, 2026
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में सोनभद्र से सामने आया फर्जीवाड़ा केवल आंकड़ों की गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की गंभीर विफलता और लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। वर्षों तक मृतक, भूमिहीन, आयकरदाता और नाबालिग तक सरकारी योजना का लाभ उठाते रहे, जबकि जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना रहा।

प्रतिकात्मक फोटो।
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Published By
Neeraj Shukla
सोनभद्र जिले में कृषि विभाग द्वारा चलाए गए सत्यापन अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में कुल 50,740 अपात्र लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं, जो लंबे समय से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे थे। इनमें सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 14,020 ऐसे लोग भी सूची में शामिल थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उनके खातों में लगातार सरकारी पैसा पहुंचता रहा।
इसके अलावा 33,800 ऐसे लाभार्थी पाए गए, जिनके पास कृषि भूमि ही नहीं है, जबकि योजना का आधार ही भूमि स्वामित्व है। यही नहीं, 591 आयकरदाता और नाबालिग भी इस योजना का लाभ लेते रहे, जो सीधे तौर पर पात्रता नियमों का उल्लंघन है।
मामला यहीं नहीं रुकता—जांच में यह भी सामने आया कि 1658 लोगों ने दोहरा पंजीकरण करा रखा था, जबकि 569 मामलों में पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग लाभ मिल रहा था। यह स्थिति दर्शाती है कि न केवल जमीनी स्तर पर बल्कि डिजिटल सिस्टम में भी गंभीर खामियां बनी रहीं।
अब विभाग ने अपात्रों की सूची शासन को भेज दी है और आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पूरा खेल इतने वर्षों तक आखिर किसकी निगरानी में चलता रहा?क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत भी रही?
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⚠️ मुख्य खामियां और सवाल
🔴 1. मृतकों के खातों में पैसा
— निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल
14,020 मृतक लाभ लेते रहे
मृत्यु सत्यापन और डेटा अपडेट सिस्टम पर गंभीर सवाल
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🔴 2. भूमिहीन भी बने ‘किसान’
33,800 लोगों के पास जमीन नहीं
पात्रता जांच केवल कागजी साबित हुई
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🔴 3. नियमों की खुली अनदेखी
591 आयकरदाता और नाबालिग शामिल
डेटा मिलान और पात्रता सत्यापन नाकाम
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🔴 4. डिजिटल सिस्टम भी बेअसर
1658 दोहरे पंजीकरण
569 दंपती मामलों में डबल लाभ
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🔴 5. जवाबदेही से बचता तंत्र
अपात्रों की सूची भेजकर जिम्मेदारी खत्म?
अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर चुप्पी
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असली किसान बने पीड़ित
इस पूरे फर्जीवाड़े का असर अब वास्तविक किसानों पर पड़ रहा है। फार्मर रजिस्ट्री के नाम पर करीब 35 हजार किसानों की किस्त रुकने का खतरा खड़ा हो गया है, जबकि फर्जी लाभ लेने वालों पर अभी तक सख्त कार्रवाई का अभाव है। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी और संभावित मिलीभगत की कहानी है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि सरकारी योजनाएं निगरानी से ज्यादा लापरवाही के भरोसे चल रही हैं।

