₹50 हजार रिश्वत में CMO ऑफिस का संविदाकर्मी गिरफ्तार,: विधानसभा तक गूंजे भ्रष्टाचार पर फिर भी बेअसर रहा सिस्टम
05:11 PM, Mar 18, 2026
सोनभद्र में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CMO कार्यालय में तैनात संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर चंचल प्रसाद यादव की ₹50,000 रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी ने यह संकेत दे दिया है कि मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित वसूली तंत्र का हिस्सा हो सकता है।

सोनभद्र सीएमओ कार्यालय।
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Published By
Neeraj Shukla
नीरज शुक्ला
मिर्जापुर की एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को राबर्ट्सगंज रोडवेज परिसर स्थित मंदिर के पास जाल बिछाकर CMO कार्यालय (PNDT शाखा) में तैनात संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर चंचल प्रसाद यादव को ₹50,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण और नवीनीकरण के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था। शिकायतकर्ता मीरा देवी निवासी पीलीकोठी, कोतवाली देहात मिर्जापुर ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद टीम ने ट्रैप कर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को राबर्ट्सगंज कोतवाली ले जाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई में ट्रैप टीम के प्रभारी समेत कई अधिकारी शामिल रहे। आरोपी के पकड़े जाने की खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
कथित रिश्वतकांड में गिरफ्तार आरोपी।
-🔴 विधानसभा तक पहुंचा मामला, फिर भी सिस्टम रहा बेअसर
सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार और इस चर्चित कंप्यूटर ऑपरेटर का मामला पहले ही विधानसभा तक गूंज चुका था। स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी सेंटरों के अवैध संचालन और CMO कार्यालय में चल रही वसूली व्यवस्था को लेकर सदन में मुद्दा उठाया था। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि मानकविहीन अस्पताल और सेंटर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अपने मूल कार्य को छोड़कर वसूली में लिप्त है और यह सब अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। मानवाधिकार आयोग में शिकायत के बाद जांच टीम भी गठित हुई और कई संस्थानों को बंद करने की संस्तुति तक की गई, लेकिन इसके बावजूद न तो वसूली पर रोक लगी और न ही संबंधित कर्मी पर प्रभावी कार्रवाई हुई।
👉 सवाल यही है-जब मामला विधानसभा तक पहुंच चुका था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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सिस्टम पर उठते सवाल:
जिले में अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई में लापरवाही क्यों? मानक पूरा करने वाले अस्पतालों को ही दबाव में क्यों रखा जाता था? क्या ईमानदार संचालकों को परेशान कर वसूली तंत्र को जिंदा रखा जा रहा था?
सबसे बड़ा सवाल—एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर आखिर किसके संरक्षण में इतना प्रभावशाली हो गया था ?
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मिलीभगत की आशंका:
क्या पीसी-पीएनडीटी और अस्पताल पंजीकरण नोडल अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है ? क्या अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे? क्या ऊपर तक “कट” जाने के कारण सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था ?
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आवास और कार्यशैली पर सवाल:
आरोपी चंचल प्रसाद यादव मेडिकल कॉलेज के आवासीय परिसर में रहता था, जहां केवल अधिकृत डॉक्टर और अधिकारी रहते हैं। ऐसे में वह वहां किसके संरक्षण में रह रहा था? सूत्रों के अनुसार आरोपी अक्सर ऑफिस से गायब रहता था, हफ्तों तक फाइलें लंबित रहती थीं और लोगों को चक्कर लगवाए जाते थे। सवाल यह है कि उसकी निगरानी कौन कर रहा था या उसे जानबूझकर छूट दी गई थी?
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अहम सवाल:
- मानक पूरे करने वाले परेशान, पैसे देने वाले पास ?
- CMO ऑफिस पर गंभीर आरोप, मेडिकल सिस्टम में सेटिंग का खेल!
- 50 हजार में होता था रजिस्ट्रेशन ?
- क्या गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे राज: कौन दे रहा था संरक्षण, कौन ले रहा था हिस्सा ?
रिश्वत।
CCTV जांच की मांग
मेडिकल कॉलेज आवासीय परिसर और CMO कार्यालय के CCTV फुटेज के मिलान से बड़े खुलासे हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार आवास के आसपास संदिग्ध लोगों की आवाजाही भी इस पूरे नेटवर्क की ओर इशारा करती है। यह मामला केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि कार्रवाई केवल एक कर्मचारी तक सीमित रहती है या स्वास्थ्य विभाग के अंदर बैठे बड़े नाम भी जांच के दायरे में आते है।

