कंप्यूटर ऑपरेटर तो मोहरा, असली खिलाड़ी कौन ? : रिश्वत कांड में उठे बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश
06:41 PM, Mar 18, 2026
सोनभद्र में CMO कार्यालय के संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर चंचल प्रसाद यादव की ₹50,000 रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी के बाद अब मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आए तथ्यों ने न सिर्फ विभागीय दावों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीएमओ कार्यालय सोनभद्र।
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Published By
Neeraj Shukla
सोनभद्र में CMO कार्यालय के संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर चंचल प्रसाद यादव की ₹50,000 रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी के बाद अब मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आए तथ्यों ने न सिर्फ विभागीय दावों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चंचल यादव आरोपी।
मामला क्या है:
मिर्जापुर की एंटी करप्शन टीम ने चंचल प्रसाद यादव को अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण व नवीनीकरण के नाम पर ₹50,000 लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित वसूली तंत्र से जुड़ा हो सकता है।हटाने के दावे बनाम हकीकत:करीब डेढ़ से दो माह पूर्व एक प्रकरण में नाम सामने आने के बाद CMO की ओर से यह दावा किया गया था कि संबंधित नोडल अधिकारी, सह-नोडल अधिकारी और चर्चित कंप्यूटर ऑपरेटर को जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है।लेकिन गिरफ्तारी मेमो के अनुसार, आरोपी गुपचुप तरीके से चार्ज लेकर पूर्व की जिम्मेदारियां ही संभाल रहा था।
👉 इससे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि- जब जिम्मेदारी हटाने की बात सार्वजनिक रूप से कही गई थी, तो फिर पर्दे के पीछे काम कौन करवा रहा था? जिम्मेदारी और वसूली पर सवाल:अस्पताल, पैथोलॉजी क्लीनिक और अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण व नवीनीकरण की प्रक्रिया संबंधित बाबू, नोडल अधिकारी और CMO के अधीन होती है।
👉 ऐसे में प्रमुख सवाल हैं—
संविदाकर्मी किसके निर्देश पर रुपए लेने गया था?क्या यह वसूली अकेले संभव थी?या यह एक संगठित तंत्र का हिस्सा था? नोडल अधिकारी की भूमिका पर चर्चा :बीच के कुछ महीनों को छोड़ दें तो वर्तमान में तैनात नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव करीब 5 वर्षों से इस पद पर बने हुए हैं
।सूत्रों के अनुसार—आरोपी को अक्सर नोडलअधिकारी के आवास के आसपास देखा जाता था। इसकी पुष्टि CCTV फुटेज से की जा सकती है👉 हर बार लाइसेंस रिनुअल के समय भी वही नोडल अधिकारी तैनात रहते हैं। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि—इतनी बड़ी रकम किसके इशारे पर ली जा रही थी और किसका संरक्षण था?
कार्यालय के अंदरूनी सिस्टम पर शक:
CMO कार्यालय में लंबे समय से तैनात कुछ अधिकारियों और चर्चित कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक यह पूरा मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे “सेट सिस्टम” की ओर इशारा करता है।विधानसभा और पुरानी शिकायतें:यह मुद्दा पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है, जहां स्वास्थ्य विभाग में कथित वसूली और अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होना अब खुद एक बड़ा प्रश्न बन गया है।निष्कर्ष:इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।👉 अब देखने वाली बात यह होगी कि -क्या जांच का दायरा बढ़ाकर जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंचती है, या मामला केवल एक संविदाकर्मी की गिरफ्तारी तक सीमित रह जाता है।

